भारत में मानसूनी जलवायु क्यों है?

भारत में मानसूनी जलवायु क्यों है? | RainViewer ब्लॉग

भारत में सालाना बारिश का 70 से 90% हिस्सा जून और सितंबर के बीच गिरता है। भारत में मानसूनी जलवायु इसलिए है क्योंकि हर गर्मी में यहाँ की ज़मीन आसपास के महासागर से तेज़ी से गर्म होती है, और यही अंतर महासागर की नमी भरी हवा को उपमहाद्वीप की ओर खींच लाता है।

मानसून है क्या?

मानसून प्रचलित हवाओं की मौसमी दिशा-पलट है। गर्मियों में हवा महासागर से ज़मीन की ओर बहती है और सर्दियों में ज़मीन से महासागर की ओर, और गर्मियों वाला यही प्रवाह बरसाती मौसम लाता है। यह शब्द अरबी के मौसिम से आया है, जिसका मतलब है मौसम।

चरण 1: ज़मीन महासागर से तेज़ी से गर्म होती है

उत्तरी गोलार्ध की गर्मियों में भारतीय उपमहाद्वीप और मध्य एशिया हिंद महासागर के मुकाबले कहीं ज़्यादा गर्म होते हैं। गर्म हवा ऊपर उठती है और ज़मीन के ऊपर दबाव गिर जाता है। ठंडे महासागर के ऊपर की हवा उसी कम दबाव वाले क्षेत्र की ओर बहती है और अपने साथ वह नमी लाती है जो उसने समुद्र के ऊपर से उठाई थी।

भारत पर RainViewer की तापमान लेयर, जिसमें उपमहाद्वीप का भीतरी हिस्सा गहरे नारंगी रंग में है और हिमालय की तलहटी कहीं ज़्यादा ठंडी

चरण 2: बारिश की पट्टी उत्तर की ओर खिसकती है

अंतःउष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र भूमध्य रेखा के पास की वह पट्टी है जहाँ दोनों गोलार्धों की हवाएँ मिलती हैं और हवा ऊपर उठती है, इसलिए बारिश वहीं केंद्रित हो जाती है। गर्मियों में यह उत्तर की ओर कर्क रेखा की तरफ़ खिसकती है। यह खिसकाव उपमहाद्वीप के ऊपर बने कम दबाव के तंत्र को मज़बूत करता है और मानसूनी प्रवाह को भीतर खींच लेता है।

दक्षिण-पश्चिम मानसून जून के पहले हफ़्ते में केरल पहुँचता है और जुलाई की शुरुआत से मध्य तक पूरे देश को ढक लेता है।

मानसूनी प्रवाह भारत तक दो शाखाओं में पहुँचता है। एक अरब सागर पार करके पश्चिमी तट से टकराती है। दूसरी बंगाल की खाड़ी पार करके पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के ऊपर बढ़ती है। दोनों शाखाएँ झटकों में आगे बढ़ती हैं, जहाँ बारिश के दौर के बाद ठहराव आता है, इसलिए यह मौसम एक-सी लगातार बारिश का नहीं होता।

चरण 3: तिब्बत का पठार ऊँचाई पर गर्मी जोड़ता है

तिब्बत का पठार गर्मियों में तप जाता है, और उसके ऊपर उठती हवा उपोष्णकटिबंधीय पछुआ जेट धारा से मिलती है। यही मेल उष्णकटिबंधीय पुरवा जेट बनाने में मदद करता है, जो भारत के ऊपर से पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है और दक्षिण-पश्चिम मानसून को सहारा देती है।

चरण 4: पहाड़ तय करते हैं कि बारिश कहाँ गिरेगी

पश्चिमी घाट पश्चिमी तट के साथ-साथ नमी भरी हवा को ऊपर की ओर धकेलते हैं। ऊपर उठते हुए हवा ठंडी होती है और नमी हवा-मुखी ढलान पर बारिश बनकर गिरती है। हिमालय इस प्रवाह को उत्तर की ओर रोकता है और मानसूनी तंत्रों को उत्तर भारत के आर-पार मोड़ता है।

एक ही हवा, जिस भूभाग से टकराती है उसके हिसाब से, बिलकुल अलग-अलग बारिश देती है।

मानसून कब लौटता है

दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी उत्तर-पश्चिम भारत से सितंबर में शुरू होती है और अक्टूबर की शुरुआत तक चलती है। पूर्वोत्तर मानसून 20 अक्टूबर के आसपास शुरू होता है और करीब 50 दिन तक रहता है। लौटते मानसून में दिन नहीं, हफ़्ते लगते हैं , क्योंकि यह क्षेत्र-दर-क्षेत्र लौटता है।

मानसून रोज़मर्रा की ज़िंदगी को क्यों गढ़ता है

करीब 60% भारतीय रोज़गार और आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं, और भारत की खेती की ज़मीन का आधे से ज़्यादा हिस्सा वर्षा-आधारित है। देश की जीडीपी में कृषि का हिस्सा 17 से 20% है।

मानसून यह भी तय करता है कि किस जगह की यात्रा सार्थक रहेगी। बारिश कहाँ नज़ारों को बदल देती है, यह जानने के लिए देखें मानसून में भारत में घूमने की सबसे अच्छी जगहें ।

बारिश को उसी वक्त देखें, जब वह हो रही हो

पूरे मौसम का कुल आँकड़ा यह नहीं बताता कि बीती रात बारिश कहाँ हुई। RainViewer मानसून को रडार मैप पर दिखाता है, जो हर 5 मिनट में अपडेट होता है, और आने वाले 2 घंटे तक की संभावित बारिश भी।

RainViewer दिखाता है कि मैप पर किसी भी जगह कितनी बारिश हुई, बीते 1 से 48 घंटे तक की किसी भी अवधि के लिए।

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